बौद्ध धर्म में क्या स्त्रींवों से है कोई भेदभाव – with Reference

प्रश्न: बौद्ध धर्म में क्या स्त्रीं वों से है कोई भेदभाव किया जाता है?

बौद्ध मत में नारी सम्बन्धी विचार ( साभार श्री कार्तिक अय्यर )

ये सब हमने बौद्ध मत के मान्य ग्रंथों से ही लिखा है, राहुल सांकृत्यायन, भदन्त आनंद  कौसल्यायन आदि आदि ने जो लिखा, वो हमने नकल कर दिया। यदि इनमें बुराई हो, तो बुराई का दोष उन ग्रन्थों का है. प्रकाशक लेखक अनुवादक आदि सभी बौद्ध हैं.

१:- स्त्री वर्ग संतापी, ईर्ष्यालु, मूर्ख, मत्सरी और बुद्घिहीन है।
(अंगुत्तरनिकाय चक्कतुनिपात) (Link)


२:- स्त्रियां धूर्त,झूठी,कारस्थानी,अप्रामाणिक,गुप्त व्यवहार करने वाली है। “
(जातककथा ६२/१९२)


३:-“भिक्षुओं! काले सांप में पांच दुर्गुण हैं। अस्वच्छता,दुर्गंध,बहुत सोने वाला,भयकारक और मित्रद्रोही(विश्वासघाती)। ये सारे दुर्गुण स्त्रियों में भी हैं। वे अस्वच्छ,दुर्गंधयुत,बहुत सोने वाली,भय देने वाली और विश्वासघाती है।”
(अंगु.पांचवा निपात,दीपचारिका वग्गो,पठण्हसुत्त ५/२३/९)

**स्त्रियां नरकगामी हैं**
१:- अधिकतर स्त्रियों को मैंने नरक में देखा है। उसके तीन कारण हैं जिससे स्त्रियां नरकगामी बनती हैं:-
-वो पूर्वाह्न काल में, सुबह, कृपण और मलिन चित्त की होती है।
-दोपहर में मत्सर युक्त होती हैं।
-रात को लोभ और काम युक्त चित्त की होती है।
(संयुक्त निकाय,मातुगामसंयुत्त,पेयाल्लवग्गो , तीहिधम्मोसुत्त ३५/१/४)

**स्त्रियों को बुद्ध बनने का अधिकार नहीं है**
१:- स्त्री कभी भी बुद्ध नहीं बन सकती।
(पाली जातक,अट्ठकथानिदान,निदानकथा १९)
वैदिक मान्यता में स्त्रियाँ ऋषियों के समान ऋषिका भी हैं.

२:- स्त्री बुद्ध नहीं बन सकती। केवल तभी बन सकती है जब पुरुष का जन्म ले ले। स्त्री चक्रवर्ती सम्राट भी नहीं बन सकती । केवल पुरुष ही राजा बन सकता है। केवल पुरुष ही शक्र,मार,ब्रह्मा बन सकता है।
(अंगुत्तरनिकाय, एककनिपात,असंभव वग्गो,द्वितीय वर्ग, १/१५/१)

**बौद्ध धम्मसंघ में स्त्रियों की स्थिति**

१:- स्त्री को संन्यास लेने की शर्त बताते हुये बुद्ध कहते हैं कि-
-भले ही भिक्षुणी सौ साल की ही क्यों न हो,अपने से छोटे उम्र के भिक्षु को नमस्कार करेगी। उसके आते ही उठ जायेगी।
-किसी भी स्थिति में स्त्री भिक्षु का अनादर न करे,न उसको अपशब्द कहे।
-भिक्षु को कोई भिक्षुणी कभी भी उपदेश न करे। भिक्षु ही भिक्षुणी को उपदेश दे सकता है।
(अंगुत्तरनिकाय, आठवां निपात,गोतमीवग्गो,गोतमीसुत्त)

२:- बुद्ध मना कर देते हैं कि भिक्षु अपने से बड़ी आयु की भिक्षुणी को नमस्कार करे,आदर करे।
( विनयपिटक, चुल्लवग्गो,भिक्षुणी स्कंधक पेज ५२८, राहुल सांकृत्यायन)

**स्त्रियों की निंदा**
१:- स्त्रियां पुरुष का मन विचलित करती हैं।स्त्री का गंध,आवाज,स्पर्श विचलित करता है। स्त्री मोह में डालती है।
(अंगुत्तरनिकाय एककनिपात रुपादिवर्ग १)
२:- जब भिक्षु भिक्षापात्र लेकर जाये,कोई कन्या या युवती दिखे तो कोई और भिक्षु उसके साथ होना चाहिये ।

(संयुक्तनिकाय २०-२०)
३:- स्त्री मार का बंधन है यानी बुरी शक्ति है। जिसके हाथ में तलवार हो,पिशाच हो,विष देने वाला हो,उससे बात कर लो। पर स्त्री से कभी मत बोलो।
(अंगुत्तरनिकाय पांचवानिपात,विवरणवग्गो मातापुत्तसुत्त ५/६/५)

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